Thursday, 19 January 2012

पथझड


पथझड मे मिले थे हम,
फिर जाने तुम कहां गुम हो गए
पथझड बीता, बहार आई, सावन बरस के चला गया
अब फिर से पथझद का मौसम है,
सूखे गिरे पत्तॊं में  तलाशते है हम
के किसी पत्ते पे तुम्हारी ह्सीं के निशान मिले

1 comment:

  1. uufff.. searchig for smile in dried leaves... hmmm...
    Awesome...

    ReplyDelete